मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल 24 से 27 दिसम्बर तक राजनगर और सौराठ में

 मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल इस साल 24 से 27 दिसम्बर तक राजनगर और सौराठ में आयोजित किया जा रहा है।इस महती उत्सव का विधिवत शुभारंभ 8 दिसम्बर को केरल के राज्यपाल महोदय महामहिम श्री आरिफ मोहम्मद खान साहब ने दिल्ली में किया है।

 बहुरंगी इस आयोजन में मिथिला के इतिहास, कला, संस्कृति, परंपरा, समृद्ध बौद्धिक एवं साहित्यिक संपदा, आध्यात्मिक और दार्शनिक चिन्तन की अविरल धारा के प्रवाह को रेखांकित करनेवाली अनेक विद्वद गोष्ठी और कार्यशालाओं का समावेश किया गया है।जहाँ प्रतिदिन सायंकाल शास्त्रीय गायन, वादन, रैप शो और नाट्य प्रस्तुति आदि का मंनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे वहीं दिन भर विद्वत्परिचर्चाओं और कार्यशालाओं के अलावे विभिन्न आयु वर्ग के स्त्री पुरुषों और बच्चों के लिए कई प्रतियोगिताएँ भी होंगी।इनमें 26 दिसम्बर को बच्चों के लिए संस्कृत में श्लोक पाठ और मैथिली कविता पाठ प्रतियोगिता एवं बालिकाओं के लिए विशेषरूप से अरिपन प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण हैं।

 मैथिल महिलाओं द्वारा परंपरा से संरक्षित लोक गीत, अरिपन, चित्रकला, पसाहनि (मेकअप), जनेऊ निर्माण, पथिया मौनी कारीगरी, स्वादिष्ट मैथिल भोज्य व्यंजनों आदि पर कार्यशालाएँ और प्रतियोगिताओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है।विविध विषयों पर मिथिला की बृहद बौद्धिक देन के मद्देनजर चारों दिन राजनगर में और 26 दिसम्बर को सौराठ में पच्चीस से ऊपर गोष्ठियों में विद्वान विशेषज्ञों द्वारा विचार विमर्श किया जाएगा।

इसमें सौराठ में विश्व प्रसिद्ध वैवाहिक सभा गाछी से वैवाहिक सभा के लुप्तप्राय हो जाने पर उसके गौरव को पुनः प्रतिष्ठित किस प्रकार किया जाए जिससे शादी तय करने में कन्यापक्ष को जो व्यय और परेशानी बढ़ गई है उसे कम किया जा सके।साथ ही सौराठ सभा द्वारा शादी के लिए विभिन्न जातियों को प्रेरित और उत्साहित किया जा सके।
       
26 को ही सौराठ में तीसरे पहर से पंजी की विविध पहलुओं पर और इसके नष्ट होते जा रहे प्राचीन पाण्डुलिपियों की सुरक्षा पर परिचर्चा की जाएगी।सौराठ में इस उत्सव का समापन एक विशाल कवि सम्मेलन के साथ होगा जिसमें मैथिली के सभी प्रमुख कवियों के सम्मिलित होने की संभावना है। सौराठ में 26 को दो बजे दिन से महिलाओं के लिए गीतनाद और अरिपन की प्रतियोगिता भी आयोजित है। 
     
 राजनगर में 24 से 27 तक दिन में दस बजे से संध्या पाँच बजे तक जो विचार गोष्ठियां हैं उनमें चौबीस को मिथिला में जल से संबद्ध विविध समस्याओं, पोखरों की कम होती जा रही संख्या एवं जल प्रदूषण पर महत्वपूर्ण विमर्श विशेषज्ञों द्वारा आहुत है।उसी दिन मिथिला के इतिहास, शिक्षा और मैथिली भाषा एवं उससे संबद्ध बोलियों पर अलग अलग गोष्ठियों में विद्वानगण परिचर्चाएँ करेंगे।
     
25 दिसम्बर को मैथिली साहित्य की विविध विधाओं और मिथिलाक्षर पर गोष्ठियों के साथ ही मिथिला के विभिन्न राजवंशों से संबंधित ड्यौढ़ियों के सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में योगदान पर भी एक परिचर्चा है।इसी दिन मिथिला के संगीत घराना पर गोष्ठी और इस्लामी संस्कृति का मिथिला में प्रभाव पर विशेषज्ञों द्वारा विमर्श किए जाएंगे।
      
26 तारीख के मुख्य आकर्षण में प्रवासी मैथिलों का अपने अपने क्षेत्रों में देन, उपलब्धि, उनका सामाजिक जीवन और समस्याओं पर परिचर्चा तथा भारतीय वाङमय में सीता पर विमर्श महत्वपूर्ण हैं।इसी दिन की अन्य गोष्ठियों में स्थानीय उद्योग, कृषि एवं कृषक से संबंधित बातें,विज्ञान चेतना, बाल साहित्य और पत्रकारिता एवं सोशल मीडिया प्रमुख आकर्षण हैं।
      
27 दिसम्बर को पूर्वाह्न में जो परिचर्चाएँ हैं वे हैं, मिथिला चित्रकला, मिथिला-मैथिली आन्दोलन, मैथिली कविताओं का वर्तमान स्वरूप और दर्शन के क्षेत्र में मिथिला का योगदान।
       
दोपहर बाद 27 दिसम्बर को इस उत्सव का समापन सत्र होगा जिसमें विविध प्रतियोगिता में सफल प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया जाएगा।साथ ही अन्य कार्यक्रमों के प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया जाएगा।
      
इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले श्रोताओं, दर्शकों, कलाकारों और विद्वानों द्वारा किसी भी कार्यक्रम के दौरान अपना सेल्फी ले कर मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल पेज के साथ टैग कर सोशल मीडिया पर दिया जा सकता है।तीन श्रेष्ठ तस्वीरों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।
       
मधुबनी क्षेत्र सदियों से मिथिला की बौद्धिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।आशा है स्थानीय लोगों के उत्साहपूर्ण सहयोग और शुभाकांक्षा से इस वर्ष भी यह फेस्टिवल सफलतापूर्वक सम्पन्न होगा।24 दिसम्बर उद्घाटन सत्र में मिथिला संस्कृति से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तक "मड़बा" का लोकार्पण भी किया जाएगा।

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