मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल: छह में से चार दर्शन की उत्पत्ति मिथिला में- आरिफ मोहम्मद खान
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने रविवार, 8 दिसंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ किया।
फेस्टिवल का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि मिथिला शुरू से ही ज्ञान की भूमि रही है और वैदिक दर्शन के षड्दर्शन में से से चार की उत्पत्ति मिथिला में हुई है। लेकिन ये दुख की बात है कि हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से खुद अनभिज्ञ हैं।
शुभारंभ के अवसर पर आगा खान ट्रस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रतीश नंदा ने कहा कि निजामुद्दीन, हुमायूं के मकबरा की तरह ही हम राजनगर में खंडहर में तब्दील हो रहे महल और स्मारक को संरक्षित कर सकते हैं। इसके लिए हमें प्रोजेक्ट को स्थानीय लोगों को जोड़ना होगा और उन्हें साथ लेकर चलना होगा। उनके आर्थिक पहलुओं का ख्याल रखना होगा।
मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल को केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के कुलपति प्रो रमाशंकर दुबे, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मणीन्द्र नाथ ठाकुर और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिनंद जोशी ने भी संबोधित किया। सभी अतिथियों का स्वागत मिथिला परंपरा के अनुसार पाग, मखान और मिथिला पेंटिंग से किया गया।
मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल का मुख्य आयोजन मधुबनी जिला के राजनगर और सौराठ में 24 से 27 दिसंबर के बीच होना है। इस फेस्टिवल में मिथिला के साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर मंथन और संवाद का आयोजन किया जाएगा।
मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल कार्यक्रम के आयोजन में अखिलेश झा, सविता झा खान और अरविंद झा का प्रमुख योगदान रहा। इसके साथ ही अमरनाथ झा, मणिकांत झा, अजय पाठक, श्रीमती कुमुद दिवान, उद्योगपति आरसी चौधरी, प्रो देवेंद्र चौबे, प्रो अखलाक अहान, देवेन्द्र मिश्र जी ने भी अपना योगदान दिया। कार्यक्रम में रुबी, रीना, अंबे, वंदना, नंदिनी, मनिमाला, डाली (सखी बहिनपा समूह), रिपुंजय, उत्पल, अभिषेक, स्पर्श गौरव, आनंद, श्रेया, पायल, पंकज, बजरंग, गौरव, भास्कर, आकांक्षा, चंदन, प्रो सुशांत, आशुतोष पाठक और रामबाबू सिंह भी उपस्थित थे।
फेस्टिवल का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि मिथिला शुरू से ही ज्ञान की भूमि रही है और वैदिक दर्शन के षड्दर्शन में से से चार की उत्पत्ति मिथिला में हुई है। लेकिन ये दुख की बात है कि हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से खुद अनभिज्ञ हैं।
शुभारंभ के अवसर पर आगा खान ट्रस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रतीश नंदा ने कहा कि निजामुद्दीन, हुमायूं के मकबरा की तरह ही हम राजनगर में खंडहर में तब्दील हो रहे महल और स्मारक को संरक्षित कर सकते हैं। इसके लिए हमें प्रोजेक्ट को स्थानीय लोगों को जोड़ना होगा और उन्हें साथ लेकर चलना होगा। उनके आर्थिक पहलुओं का ख्याल रखना होगा।
मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल को केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के कुलपति प्रो रमाशंकर दुबे, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मणीन्द्र नाथ ठाकुर और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिनंद जोशी ने भी संबोधित किया। सभी अतिथियों का स्वागत मिथिला परंपरा के अनुसार पाग, मखान और मिथिला पेंटिंग से किया गया।
मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल का मुख्य आयोजन मधुबनी जिला के राजनगर और सौराठ में 24 से 27 दिसंबर के बीच होना है। इस फेस्टिवल में मिथिला के साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर मंथन और संवाद का आयोजन किया जाएगा।
मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल कार्यक्रम के आयोजन में अखिलेश झा, सविता झा खान और अरविंद झा का प्रमुख योगदान रहा। इसके साथ ही अमरनाथ झा, मणिकांत झा, अजय पाठक, श्रीमती कुमुद दिवान, उद्योगपति आरसी चौधरी, प्रो देवेंद्र चौबे, प्रो अखलाक अहान, देवेन्द्र मिश्र जी ने भी अपना योगदान दिया। कार्यक्रम में रुबी, रीना, अंबे, वंदना, नंदिनी, मनिमाला, डाली (सखी बहिनपा समूह), रिपुंजय, उत्पल, अभिषेक, स्पर्श गौरव, आनंद, श्रेया, पायल, पंकज, बजरंग, गौरव, भास्कर, आकांक्षा, चंदन, प्रो सुशांत, आशुतोष पाठक और रामबाबू सिंह भी उपस्थित थे।
मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल की और तस्वीरें-











Bad nik prayas.Ham sab sampurn Mithila vasi apane loknik sarahna karait karait chhi
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